स्पाइरोमेट्री और FOT (Forced Oscillation Technique) दोनों ही फेफड़ों की कार्यक्षमता मापने के आधुनिक और सुरक्षित परीक्षण हैं। इन टेस्टों में व्यक्ति को एक विशेष मशीन से जोड़ा जाता है, जिसके ज़रिए उसकी साँस लेने और छोड़ने की गति, मात्रा और फेफड़ों की क्षमता को मापा जाता है।
स्पाइरोमेट्री में मरीज को गहरी साँस लेकर पूरी ताकत से फूंक मारने को कहा जाता है। इससे पता चलता है कि फेफड़े कितनी हवा बाहर निकाल पा रहे हैं और कितनी तेज़ी से निकाल रहे हैं। यह टेस्ट अस्थमा (Asthma), एलर्जी, या COPD जैसी बीमारियों के निदान और इलाज की प्रभावशीलता जांचने में मदद करता है।
FOT (Forced Oscillation Technique) में मरीज को केवल सामान्य तरीके से साँस लेनी होती है, और मशीन बिना किसी मेहनत के फेफड़ों के अंदर की रुकावट (resistance) और लोच (reactance) को माप लेती है। यह टेस्ट बच्चों, बुजुर्गों या ऐसे मरीजों के लिए उपयोगी है जिन्हें स्पाइरोमेट्री में ज़ोर से फूंक मारने में कठिनाई होती है।
इन दोनों परीक्षणों से डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि आपके फेफड़े कितने प्रतिशत काम कर रहे हैं और कहीं कोई रुकावट या कमजोरी तो नहीं है।
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